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नई दिल्ली। योग गुरु और कारोबारी बाबा रामदेव तथा भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच Gen Z को लेकर हुई बयानबाजी अब शांत होती नजर आ रही है। कंगना रनौत द्वारा रामदेव की ‘गटर जेनरेशन’ वाली टिप्पणी पर सवाल उठाए जाने के बाद योग गुरु ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को आगे बढ़ाना नहीं चाहते और कंगना रनौत को लेकर आगे कोई टिप्पणी नहीं करने का फैसला किया है।
यह पूरा विवाद युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z को लेकर बाबा रामदेव की कथित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ। रामदेव ने एक बयान में युवा पीढ़ी के एक वर्ग पर टिप्पणी करते हुए ‘गटर जेनरेशन’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चा शुरू हो गई। इसी क्रम में कंगना रनौत ने भी इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी और Gen Z को लेकर इस तरह की भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।
VIDEO | Reacting to remark of BJP leader Kangana Ranaut, Swami Ramdev (@yogrishiramdev) says, "I don't want to escalate the matter, the country knows who is Swami Ramdev, what is my contribution, that is why I don't want to comment on such people."#KanganaRanaut #SwamiRamdev pic.twitter.com/nK7vFDiQDw
— Press Trust of India (@PTI_News) August 23, 2026
कंगना ने रामदेव की टिप्पणी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को इस तरह के शब्दों से संबोधित करना उचित नहीं है। उनके बयान के बाद दोनों के बीच सार्वजनिक रूप से टिप्पणी और प्रतिक्रिया का सिलसिला शुरू होने की संभावना बनी, लेकिन अब रामदेव ने इसे आगे न बढ़ाने का फैसला किया है।
रामदेव ने कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहते। उन्होंने अभिनेत्री और भाजपा सांसद के बारे में आगे किसी तरह की टिप्पणी करने से भी इनकार किया। इससे संकेत मिला है कि वह विवाद को सार्वजनिक बहस में बदलने के बजाय यहीं समाप्त करना चाहते हैं।
Gen Z शब्द आम तौर पर उस पीढ़ी के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो मोटे तौर पर 1990 के दशक के अंतिम वर्षों से लेकर 2010 के शुरुआती वर्षों के बीच जन्मी है। यह पीढ़ी इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हुई है। इसकी जीवनशैली, काम करने का तरीका और सामाजिक मुद्दों को देखने का नजरिया पिछली पीढ़ियों से अलग माना जाता है।
इसी पीढ़ी को लेकर देश में अक्सर सार्वजनिक बहस होती रहती है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, डिजिटल संस्कृति, रोजगार के बदलते तौर-तरीकों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को लेकर Gen Z को लेकर अलग-अलग विचार सामने आते हैं। रामदेव की टिप्पणी भी इसी व्यापक बहस का हिस्सा बन गई।
कंगना रनौत खुद सार्वजनिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर बयान देने के लिए जानी जाती हैं। भाजपा सांसद के रूप में भी वह कई मुद्दों पर अपनी राय खुलकर व्यक्त करती रही हैं। ऐसे में जब उन्होंने रामदेव की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, तो मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
दूसरी ओर, बाबा रामदेव लंबे समय से योग, स्वास्थ्य और सामाजिक विषयों पर अपने विचार सार्वजनिक मंचों से रखते रहे हैं। कारोबारी गतिविधियों के अलावा वह विभिन्न सामाजिक और समसामयिक मुद्दों पर भी बयान देते रहे हैं। Gen Z को लेकर उनकी टिप्पणी ने एक बार फिर उनके बयान को चर्चा में ला दिया।
हालांकि, रामदेव की ताजा प्रतिक्रिया से विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय समाप्त करने की कोशिश नजर आ रही है। उन्होंने साफ किया कि वह कंगना रनौत पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उनका यह रुख ऐसे समय में आया है जब दोनों की टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही थीं।
इस विवाद में एक अहम पहलू यह भी है कि युवा पीढ़ी को लेकर सार्वजनिक बहस अक्सर पीढ़ियों के बीच सोच के अंतर को सामने लाती है। वरिष्ठ पीढ़ी जहां Gen Z की बदलती जीवनशैली और व्यवहार को अलग नजरिए से देखती है, वहीं युवा वर्ग अपने फैसलों, तकनीक के इस्तेमाल और सामाजिक प्राथमिकताओं को बदलते समय के अनुरूप मानता है।
रामदेव की टिप्पणी की आलोचना करने वालों का कहना है कि युवाओं के पूरे वर्ग को किसी नकारात्मक शब्द से संबोधित करना उचित नहीं है। वहीं, उनके समर्थक इसे युवा पीढ़ी के कुछ व्यवहारों को लेकर की गई टिप्पणी के रूप में देखते हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय सामने आई।
कंगना रनौत की प्रतिक्रिया के बाद मामला राजनीतिक रंग भी ले सकता था, क्योंकि वह भाजपा की सांसद हैं और रामदेव भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं। हालांकि, रामदेव के ताजा रुख से फिलहाल इस विवाद के और बढ़ने की संभावना कम होती दिख रही है।
उन्होंने कंगना के बयान पर आगे कोई व्यक्तिगत प्रतिक्रिया देने से बचने का फैसला किया है। इससे दोनों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी पर विराम लग सकता है। अब चर्चा का केंद्र भी व्यक्तिगत विवाद के बजाय Gen Z और युवा पीढ़ी को लेकर उठे व्यापक सवालों पर जा सकता है।
सोशल मीडिया के दौर में सार्वजनिक हस्तियों की छोटी-सी टिप्पणी भी तेजी से व्यापक बहस का रूप ले लेती है। इस मामले में भी ऐसा ही देखने को मिला। एक ओर युवा पीढ़ी को लेकर रामदेव का बयान चर्चा में आया, तो दूसरी ओर कंगना की प्रतिक्रिया ने इसे और सुर्खियों में ला दिया।
फिलहाल बाबा रामदेव ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने कंगना रनौत पर आगे टिप्पणी न करने का फैसला किया है। ऐसे में दोनों के बीच Gen Z को लेकर शुरू हुई सार्वजनिक बयानबाजी पर विराम लगने की उम्मीद है।
इस पूरे घटनाक्रम ने हालांकि एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा किया है कि बदलती पीढ़ी को समझने और उसके व्यवहार पर टिप्पणी करने के लिए सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों की भाषा कैसी होनी चाहिए। Gen Z को लेकर बहस आगे भी जारी रह सकती है, लेकिन रामदेव और कंगना के बीच यह विशेष विवाद फिलहाल शांत होता नजर आ रहा है।





